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Education News: UGC-NET की 3 परीक्षाएं रद्द, राहुल गांधी ने केंद्र पर साधा निशाना; सितंबर में फिर होगा एग्जाम

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Alam Ki Khabar | Bihar News | Patna News | Samastipur News | UGC-NET के इंग्लिश, कॉमर्स और सोशियोलॉजी विषयों की परीक्षा रद्द किए जाने पर राहुल गांधी ने केंद्र और NTA पर सवाल उठाए। जानिए परीक्षा रद्द होने की वजह और नई तारीखों से जुड़ी पूरी जानकारी।

डेस्क, 17 अगस्त। UGC-NET के तीन विषयों की परीक्षा दोबारा कराए जाने के फैसले ने एक बार फिर राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) की कार्यप्रणाली को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने इस मुद्दे को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा है। उनका कहना है कि परीक्षा में हुई गड़बड़ी का खामियाजा उन अभ्यर्थियों को भुगतना पड़ रहा है, जिन्होंने महीनों और वर्षों तक तैयारी की थी।

राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट कर सरकार से परीक्षा व्यवस्था की जवाबदेही तय करने की मांग की। उन्होंने आरोप लगाया कि NTA की गलती का सीधा असर छात्रों के समय, पैसे और मानसिक दबाव पर पड़ रहा है।

तीन विषयों की परीक्षा फिर होगी

NTA के फैसले के मुताबिक UGC-NET के इंग्लिश, कॉमर्स और सोशियोलॉजी विषयों की परीक्षा दोबारा आयोजित की जाएगी। उपलब्ध जानकारी के अनुसार इन विषयों के प्रश्नपत्रों में तथ्यात्मक, टाइपिंग, अनुवाद, व्याकरण, स्पेलिंग और प्रिंटिंग से जुड़ी कमियां सामने आने के बाद परीक्षा दोबारा कराने का निर्णय लिया गया।

बताया गया है कि इन परीक्षाओं में शामिल होने वाले अभ्यर्थियों से दोबारा परीक्षा के लिए कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं लिया जाएगा।

सितंबर में निर्धारित हैं नई परीक्षाएं

तीनों विषयों के लिए नई परीक्षा तारीखें भी निर्धारित की गई हैं। इंग्लिश विषय की परीक्षा 9 सितंबर को सुबह 9 बजे होगी। कॉमर्स की परीक्षा उसी दिन दोपहर 3 बजे से आयोजित की जाएगी। वहीं सोशियोलॉजी की परीक्षा 10 सितंबर को सुबह 9 बजे शुरू होगी।

अभ्यर्थियों के लिए यह बदलाव इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि दोबारा परीक्षा का मतलब है कि उन्हें अपनी तैयारी के साथ परीक्षा केंद्र और समय से जुड़ी व्यवस्थाएं भी फिर से करनी होंगी।

राहुल गांधी ने NTA पर उठाए सवाल

राहुल गांधी ने अपनी सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि छात्रों ने परीक्षा के लिए लंबे समय तक तैयारी की, आवेदन शुल्क जमा किया और कई अभ्यर्थियों को परीक्षा केंद्र तक पहुंचने के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ी। अब परीक्षा रद्द होने के बाद उन्हें दोबारा वही प्रक्रिया अपनानी होगी।

उन्होंने सवाल उठाया कि अगर प्रश्नपत्र तैयार करने में गलती हुई तो उसकी जिम्मेदारी किसकी है और उसका बोझ छात्रों पर क्यों पड़े।

राहुल गांधी ने परीक्षा व्यवस्था को लेकर सरकार पर तीखा राजनीतिक हमला करते हुए कहा कि छात्रों के साल और मेहनत प्रभावित हो रहे हैं। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि क्या परीक्षा से पहले प्रश्नपत्र से जुड़ी कोई गड़बड़ी हुई थी।

NTA की जवाबदेही की मांग

कांग्रेस नेता ने अपने बयान में NTA के साथ-साथ उसके नेतृत्व की जवाबदेही तय करने की मांग भी की। उन्होंने कहा कि परीक्षा व्यवस्था में लगातार सामने आने वाली समस्याओं पर केवल परीक्षा दोबारा कराने से समाधान नहीं होगा, बल्कि यह भी तय होना चाहिए कि गड़बड़ी हुई कैसे।

राहुल गांधी ने इससे पहले भी प्रतियोगी परीक्षाओं और कथित पेपर लीक के मुद्दे को लेकर केंद्र सरकार पर हमला किया है। 2024 में UGC-NET की पूरी परीक्षा रद्द किए जाने के बाद भी NTA की कार्यप्रणाली और परीक्षा की विश्वसनीयता को लेकर गंभीर सवाल उठे थे। उस समय शिक्षा मंत्रालय ने परीक्षा की अखंडता प्रभावित होने की आशंका के चलते परीक्षा रद्द की थी।

छात्रों पर पड़ता है सीधा असर

किसी प्रतियोगी परीक्षा को रद्द करने या दोबारा आयोजित करने का असर सिर्फ परीक्षा की तारीख बदलने तक सीमित नहीं रहता। अभ्यर्थियों को दोबारा तैयारी का समय निकालना पड़ता है। कई छात्रों की दूसरी परीक्षाएं, नौकरी की तैयारी या अन्य शैक्षणिक योजनाएं भी प्रभावित हो सकती हैं।

दूर-दराज के इलाकों से आने वाले अभ्यर्थियों के लिए परीक्षा केंद्र तक पहुंचने का खर्च भी दोबारा उठाना पड़ सकता है। हालांकि इस मामले में परीक्षा शुल्क दोबारा नहीं लिए जाने की जानकारी छात्रों के लिए राहत वाली है।

परीक्षा की विश्वसनीयता पर फिर बहस

UGC-NET जैसी राष्ट्रीय स्तर की परीक्षा का महत्व काफी बड़ा है। यह परीक्षा उच्च शिक्षा संस्थानों में असिस्टेंट प्रोफेसर और जूनियर रिसर्च फेलोशिप जैसी पात्रताओं से जुड़ी होती है। ऐसे में प्रश्नपत्र की गुणवत्ता, परीक्षा प्रक्रिया और परिणाम की विश्वसनीयता को लेकर किसी भी तरह की गड़बड़ी अभ्यर्थियों के लिए गंभीर विषय बन जाती है।

NTA की जिम्मेदारी सिर्फ परीक्षा आयोजित करने तक सीमित नहीं है। प्रश्नपत्र की तैयारी, प्रूफरीडिंग, अनुवाद, प्रिंटिंग, परीक्षा केंद्रों की व्यवस्था और परिणाम तक पूरी प्रक्रिया में सटीकता जरूरी है। एक छोटी तकनीकी या कंटेंट संबंधी गलती भी हजारों अभ्यर्थियों को प्रभावित कर सकती है।

छात्रों को अब नई तारीख के लिए तैयार रहना होगा

इंग्लिश, कॉमर्स और सोशियोलॉजी के अभ्यर्थियों के लिए अब सबसे जरूरी है कि वे नई परीक्षा तारीखों के अनुसार अपनी तैयारी को व्यवस्थित करें। उम्मीदवारों को परीक्षा से संबंधित आधिकारिक अपडेट NTA और UGC की वेबसाइट पर ही देखना चाहिए, क्योंकि परीक्षा केंद्र, एडमिट कार्ड और अन्य निर्देशों में बदलाव होने पर अंतिम जानकारी वहीं जारी की जाएगी।

इस पूरे मामले ने एक बार फिर यह सवाल सामने ला दिया है कि राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं में प्रश्नपत्र तैयार करने से लेकर परीक्षा आयोजित करने तक की व्यवस्था कितनी मजबूत और जवाबदेह होनी चाहिए।

राजनीतिक मुद्दा भी बना परीक्षा विवाद

UGC-NET की तीन परीक्षाएं दोबारा कराने का मामला अब केवल परीक्षा प्रशासन तक सीमित नहीं रहा। विपक्ष इसे केंद्र सरकार की परीक्षा व्यवस्था की कमजोरी से जोड़ रहा है, जबकि छात्रों के लिए सबसे बड़ा सवाल यही है कि उनकी तैयारी और समय का नुकसान कैसे कम किया जाए।

राहुल गांधी ने इसी मुद्दे को उठाते हुए केंद्र से जवाबदेही तय करने की मांग की है। अब निगाहें इस बात पर रहेंगी कि दोबारा होने वाली तीनों परीक्षाएं तय तारीख पर बिना किसी नई समस्या के आयोजित हो पाती हैं या नहीं।

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परीक्षा व्यवस्था में भरोसा बहाल करना जरूरी

राष्ट्रीय स्तर की परीक्षा में किसी भी तरह की गलती का असर सीधे अभ्यर्थियों पर पड़ता है। एक छात्र महीनों तक तैयारी करता है, परीक्षा शुल्क देता है और कई बार दूसरे शहर में जाकर परीक्षा देता है। ऐसे में परीक्षा रद्द होने या दोबारा आयोजित होने की स्थिति उसके लिए सिर्फ एक प्रशासनिक बदलाव नहीं होती।

तीन विषयों की परीक्षा दोबारा कराने का फैसला उन छात्रों के लिए जरूरी सुधार हो सकता है जिन्हें प्रश्नपत्र में गलतियों का सामना करना पड़ा। लेकिन इसके साथ यह भी जरूरी है कि ऐसी त्रुटियां दोबारा न हों।

प्रश्नपत्र तैयार करने और अंतिम रूप देने से पहले कई स्तरों पर विशेषज्ञ जांच, भाषा की समीक्षा और तथ्यात्मक सत्यापन होना चाहिए। खासकर राष्ट्रीय परीक्षा में अनुवाद, टाइपिंग और प्रिंटिंग जैसी छोटी दिखने वाली गलतियां भी हजारों छात्रों के लिए बड़ी परेशानी बन सकती हैं।

सबसे महत्वपूर्ण बात जवाबदेही की है। अगर परीक्षा प्रक्रिया में गलती होती है तो छात्रों को केवल नई तारीख बताना पर्याप्त नहीं है। व्यवस्था को यह भी बताना चाहिए कि गलती कहां हुई और उसे रोकने के लिए क्या कदम उठाए गए हैं। इससे छात्रों का परीक्षा प्रणाली पर भरोसा मजबूत होगा।

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